पिछली 'पोस्ट' का ज़बाब तो आना ही था .........सो आ गया ,लीजिये आप भी पढ़ लीजिये.........
तुमने जो भेजी
मुस्कानें,
होठों पर धर ली........मैनें,
किरणों के रस से
सपनों की ,
झोली है भर ली ......मैनें .
कोमल ,धवल ,चपल,
सौरभ,
संगीत ,पुलक रख
मन में.....
आँखों ,गालों,
बालों को,
दे दी सौगातें........
मैंने.
अनुपम उपहार
तुम्हारा
यह,
अनमोल बहुत
प्यारा है,
सच कहूं तुम्हें......
यह तोहफ़ा तो
हर तोहफ़े से
न्यारा है.

बहुत अच्छी रचना
ReplyDeleteMY NEW POST...मेरे छोटे से आँगन में...
Wah wah wah! Kya gazab kee rachna hai!
ReplyDeleteवाह बहुत खूब ....किसी तोहफे का कोई मोल ही नहीं होता वो अनमोल होते हैं ...
ReplyDeleteएक साथ दो चरित्र को जिया है आपने, अपनी दोनों कविताओं में और भावों की अभिव्यक्ति इतनी सहज कि दोनों भिन्न दिखाई देते हैं. बहुत ही सुन्दर!!
ReplyDeleteवाह!!!
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर भाव संयोजन
ReplyDeleteसच कहूं तुम्हें......
ReplyDeleteयह तोहफ़ा तो
हर तोहफ़े से
न्यारा है. waah....
बहुत सुन्दर सटीक प्रस्तुति। धन्यवाद।
ReplyDeleteक़ासिद के आते-आते ही, ख़त और लिख रखूं
ReplyDeleteहम जानते हैं क्या वो लिखेंगे जवाब में...
ये तोहफे है अनमोल......
ReplyDeleteसुन्दर भाव संयोजन
बहुत बढ़िया प्रस्तुति
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!
इस कविता में प्रत्यक्ष अनुभव की बात की गई है, इसलिए सारे शब्द अर्थवान हो उठे हैं।
ReplyDeletebahut sundar rachna...
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत ! इतनी सुकुमार एवं जीवंत रचना बहुत दिनों के बाद पढ़ी ! बधाई आपको !
ReplyDeletewaaah!!!
ReplyDeletebahut pyaara jawaab, shubhkaamnaayen.
ReplyDeleteBahut Khubsoorat likha hai madam apne ....
ReplyDelete