Wednesday, February 8, 2012

सच कहूं तुम्हें......

 पिछली 'पोस्ट' का ज़बाब तो आना ही था .........सो आ गया ,लीजिये आप भी पढ़ लीजिये.........

तुमने जो भेजी 
मुस्कानें,
होठों पर धर ली........मैनें,
किरणों के रस से 
सपनों की ,
झोली है भर ली ......मैनें .
कोमल ,धवल ,चपल,
सौरभ,
संगीत ,पुलक  रख 
मन में.....
आँखों ,गालों,
बालों  को,
दे दी सौगातें........
मैंने.
अनुपम उपहार 
तुम्हारा 
यह,
अनमोल बहुत 
प्यारा है,
सच कहूं तुम्हें......
यह तोहफ़ा तो 
हर तोहफ़े से 
न्यारा है.  

17 comments:

  1. Wah wah wah! Kya gazab kee rachna hai!

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  2. वाह बहुत खूब ....किसी तोहफे का कोई मोल ही नहीं होता वो अनमोल होते हैं ...

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  3. एक साथ दो चरित्र को जिया है आपने, अपनी दोनों कविताओं में और भावों की अभिव्यक्ति इतनी सहज कि दोनों भिन्न दिखाई देते हैं. बहुत ही सुन्दर!!

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  4. बहुत ही सुन्दर भाव संयोजन

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  5. सच कहूं तुम्हें......
    यह तोहफ़ा तो
    हर तोहफ़े से
    न्यारा है. waah....

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  6. बहुत सुन्दर सटीक प्रस्तुति। धन्यवाद।

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  7. क़ासिद के आते-आते ही, ख़त और लिख रखूं
    हम जानते हैं क्या वो लिखेंगे जवाब में...

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  8. ये तोहफे है अनमोल......
    सुन्दर भाव संयोजन

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  9. बहुत बढ़िया प्रस्तुति
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  10. इस कविता में प्रत्यक्ष अनुभव की बात की गई है, इसलिए सारे शब्द अर्थवान हो उठे हैं।

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  11. बहुत खूबसूरत ! इतनी सुकुमार एवं जीवंत रचना बहुत दिनों के बाद पढ़ी ! बधाई आपको !

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  12. Bahut Khubsoorat likha hai madam apne ....

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